रक्षा सेवा से जुड़ी इकाइयों में हड़ताल, तालाबंदी, छंटनी पर रोक वाला विधेयक पेश


नई दिल्ली (मानवी मीडिया)- लोकसभा में आज आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 पेश किया गया जिसमें रक्षा सेवाओं में संलग्न इकाइयों में असैन्य कर्मचारियों की हड़ताल, तालाबंदी और छंटनी पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान किए गए हैं। सदन में विपक्षी सदस्यों के शोरशराबे के बीच पीठासीन सभापति भर्तृहरि मेहताब की अनुमति से रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से यह विधेयक पेश किया। इस विधेयक को आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021 के स्थान पर लाया गया है जिसे 30 जून 2021 को जारी किया गया था।

विपक्ष की ओर से विभिन्न सदस्यों ने इस विधेयक के पुरस्थापन के विरोध में नोटिस दिए थे। रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के श्री एन के प्रेमचंद्रन ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस विधेयक से रक्षा इकाइयों में असैन्य कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की शर्ताेंका हनन होता है। इस पर भट्ट ने कहा कि प्रेमचंद्रन की आशंकाएं निर्मूल हैं और इस विधेयक में कर्मचारियों अधिकारियों के हितों का पूरी तरह से संरक्षण किया गया है। इसके पश्चात भट्ट ने विधेयक को पुरस्थापित किया। इस विधेयक में रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए जरूरी वस्तुओं या उपकरणों का निर्माण करने वाले उपक्रम, सशस्त्र बलों या उसने जुड़ा हुआ कोई विभाग, रक्षा संबंधी कोई संगठन जिनकी सेवाएं रुकने से उक्त विभाग या उनके कर्मचारियों की सुरक्षा, रक्षा उपकरण या वस्तुओं का निर्माण, ऐसी इकाइयों का संचालन या रखरखाव अथवा रक्षा से जुड़े उत्पादों की मरम्मत या रखरखाव पर असर हो, को शामिल किया गया है। सरकार उपरोक्त सेवाओं से जुड़ी इकाइयों में हड़तालों, तालाबंदी और छंटनियों पर प्रतिबंध लगा सकती है। प्रतिबंध के आदेश छह महीने तक लागू रहेंगे और छह महीने के लिए बढ़ाए जा सकते हैं।

नियोक्ता गैरकानूनी तालाबंदी या छंटनियों के जरिए प्रतिबंध के आदेश का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें एक वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है या 10,000 रुपए का जुर्माना हो सकता है, या दोनों सजाएं भुगतनी पड़ सकती हैं। अवैध हड़तालों के लिए भड़काने, उकसाने या उसे जारी रखने की कार्रवाई करने, या ऐसे उद्देश्यों के लिए धन मुहैय्या कराने वाले लोगों को दो वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है या 15,000 रुपए का जुर्माना हो सकता है, या दोनों सजाएं भुगतनी पड़ सकती हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई में सेवा की शर्तों के अनुसार नौकरी से बर्खास्तगी शामिल है। विधेयक के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय और गैरजमानती हैं।

केन्द्रीय पोतपरिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनावाल ने अंतरदेशीय जलयान विधेयक 2021 पेश किया जिसमें नदियों एवं समुद्र में अंतरदेशीय जलमार्गों के माध्यम से मालवहन को बढ़ावा देने, मालवहन करने वाले जलपोतों के पंजीकरण, निर्माण, नियोजन, प्रशासन आदि में पारदर्शिता लाने का प्रावधान किया गया है। सोनोवाल ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अंतरदेशीय जलपोतों के परिचालन नौवहन एवं उससे जुड़े सभी मुद्दों की पूरी व्यवस्था सुदृढ़ होगी। विपक्ष की ओर से करीब पांच सदस्यों ने इस विधेयक के पुरस्थापन के विरोध में नोटिस दिया था लेकिन किसी ने भी सदन में विरोध नहीं किया।

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