राष्ट्रीय लोक अदालत का 10 जुलाई, को होगा आयोजन


लखनऊ:( मानवी मीडिया)  न्यायमूर्ति  यू0यू0 ललित न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय/कार्यपालक अध्यक्ष राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा भारत वर्ष में  उच्चतम न्यायालय से तहसील स्तर तक 10 जुलाई, 2021 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है। जिसके अनुपालन में उ0प्र0 विधिक सेवा प्राधिकरण के  कार्यपालक अध्यक्ष/ कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय,  मुनीश्वर नाथ भण्डारी द्वारा उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक अदालत की व्यापक सफलता एवं आम जनता के हित में वादों का निस्तारण हेतु राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है।

यह जानकारी उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव,  सुबोध भारती (ए0जे0एस0) ने आज यहाँ दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अपराधिक शमनीय वाद, लघु अपराधिक वाद/ई-चालान, धारा-138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के वाद, बैंक वसूली वाद, मोटर दुर्घटना वाद, श्रम मामलों का निस्तारण किया जायेगा। इसके अलावा विद्युत बिल तथा जलकर वाद, पारिवारिक/वैवाहिक मामले, भूमि अधिग्रहण वाद, सेवा/वेतन सम्बन्धी वाद, राजस्व वाद तथा अन्य दिवानी वाद का भी निस्तारण किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि लोक अदालत में वादों को निस्तारित कराने से न्यायालय से निस्तारित वादों की तुलना में वादकारियों को कई लाभ मिलते हैं। जैसे कि सभी प्रकार की सिविल वाद या ऐसे अपराधों को छोड़कर जिनमें समझौता वर्जित है, सभी अपराधिक मामले भी लोक अदालतों द्वारा निपटाये जा सकते हैं। लोक अदालत के फैसलों को अदालत का फैसला माना जाता है। जिसे कोर्ट की डिक्री की तरह सभी पक्षों पर अनिवार्य रूप से बाध्य होते हुए लागू कराया जाता है। लोक अदालत के फैसले के विरूद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती है। इस प्रकार लोक अदालत के फैसले अंतिम होते हैं। लोक अदालत में समझौते के माध्यम से निस्तारित मामलों में अदा की गई कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है।

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