प्रधानमंत्री मोदी ने टटोला J-K के नेताओं का दिल, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव होंगे

नई दिल्ली (मानवी मीडिया) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव कराए जाएंगे। मोदी ने यह जानकारी जम्मू कश्मीर के सियासी भविष्य के संबंध में वहां के राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श के लिए यहां बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में दी। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अल्ताफ बुखारी ने संवाददाताओं से कहा कि बातचीत बहुत खुशनुमा माहौल में हुई। प्रधानमंत्री ने सभी नेताओं से हमारे मुद्दों को धैर्य से सुना।

उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव शुरू होंगे। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, नेशनल कांफ्रेन्स के नेता फारूख अब्दुल्ला तथा उमर फारूख और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ्ती, भाजपा के चमनलाल और जम्मू कश्मीर के अन्य राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग दलों के 14 चुनिंदा नेताओं के साथ मैराथन चर्चा की। दोपहर 3 बजे शुरू हुई बैठक करीब पौने 4 घंटे तक चली। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह दिल्ली की दूरी और दिल की दूरी दोनों ही मिटाना चाहते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन, चुनाव, पूर्ण राज्य के दर्जा की बहाली, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और डोमिसाइल जैसे मुद्दों पर खुली चर्चा हुई। 


गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि कांग्रेस की तरफ से ये साफ कर दिया गया है कि अब जम्मू-कश्मीर को फिर पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। वे मानते हैं कि अब घाटी में स्थिति भी अनुकूल है, बॉडर पर शांति है, ऐसे में इस समय अब ये कदम उठा लेना चाहिए। वहीं उनकी तरफ इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अब जम्मू कश्मीर में तुरंत विधानसभा के चुनाव होने चाहिए। उनकी नजरों में जब डीडीसी के चुनाव हो सकते हैं, ऐसे में अब विधानसभा का होना भी जरूरी है।  जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण इस बैठक में प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा जितेन्द्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सलाहकार , राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केन्द्र शासित प्रदेश के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियो ने हिस्सा लिया। 

जम्मू कश्मीर का पांच अगस्त 2019 को राज्य का दर्जा समाप्त किये जाने तथा उसे दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजित किये जाने के बाद केन्द्र की ओर से वहां के राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की पहली बार पेशकश की गई है। उधर, कश्मीरी पंडितों के संगठनों ने बैठक में उन्हें न बुलाये जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि वह एक महत्वपूर्ण पक्ष हैं और उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए। वैसे तो आधिकारिक तौर पर इस बैठक का कोई एजेंडा तय नहीं किया गया था। इस बीच बैठक के मद्देनजर केन्द्र शासित प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया गया है और समूचे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के साथ चौकसी बरती जा रही है।

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