मोदी सरकार ने स्थानीय निकायों को बांटे , 4608 करोड़ रुपये


नई दिल्ली (मानवी मीडिया): केन्द्र सरकार ने स्थानीय निकायों को अनुदान-सहायता प्रदान करने के लिए राज्यों को 4,608 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की। यह अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) दोनों के लिए हैं। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने शुक्रवार को यहां कहा कि यह राशि बुधवार को जारी की गई। इसमें से आरएलबी को 2,660 करोड़ रुपए और यूएलबी को 1,948 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। इस अनुदान को 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार जारी किया गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में वित्त मंत्रालय ने स्थानीय निकाय अनुदान के रूप में 28 राज्यों को 87,460 करोड़ रुपए जारी किए हैं। इसमें से आरएलबी के लिए 60,750 करोड़ रुपये और यूएलबी के लिए 26,710 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

आरएलबी अनुदान को पंचायत के सभी स्तरों- गांव, ब्लॉक और जिले के साथ-साथ राज्यों में पांचवीं और छठी अनुसूची के क्षेत्रों के लिए जारी किया जाता हैं। आरएलबी अनुदान आंशिक रूप से बेसिक और संयुक्त और आंशिक रूप में होता हैं। मूल अनुदानों का उपयोग आरएलबी के द्वारा स्थान-विशेष की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। दूसरी ओर, निर्धारित अनुदान का उपयोग केवल बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है । खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की स्वच्छता और रखरखाव की स्थिति और पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण के रखरखाव के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है । वर्ष 2020-21 में, मंत्रालय द्वारा बुनियादी आरएलबी अनुदान के तौर पर 32,742.50 करोड़ रुपये और निर्धारित आरएलबी अनुदान के तौर पर 28,007.50 करोड़ जारी किए गए हैं। जल आपूर्ति और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अनुदान को विशेष रूप से पानी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार और यूएलबी द्वारा स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए व्यय किया जाता है। राज्यों को क्षमता विकास के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और सेवा स्तर के मानक को पूरा करने के लिए अवसंरचनात्मक मुद्दों के समाधान करने की आवश्यकता होती है। 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के मामले में, वर्ष 2020-21 में अनुदान के रूप में 18,354 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसका 50 प्रतिशत मूल अनुदान है, जबकि शेष 50 प्रतिशत पेयजल ,वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रण सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ा है। यह राशि विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन, कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (एएमआरयूटी) आदि के तहत प्रदान की गई धनराशि के अतिरिक्त है। राज्यों को 10 कार्य दिवसों के भीतर स्थानीय निकायों को अनुदान हस्तांतरित करने की आवश्यकता होती है। इस अवधि के बाद होने वाले विलंब की स्थिति में राज्य सरकार स्थानीय निकायों को ब्याज के साथ अनुदान जारी करने के लिए उत्तरदायी होती है

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