18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन देना सही होगा या गलत, जानें हर सवाल का जवाब


नई दिल्ली (मानवी मीडिया): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से बचाव के लिए 11 से 14 अप्रैल तक देश में टीका उत्सव मनाने का आह्वान किया है। इसी बीच देश में 18 साल के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज लगवाने की मांग उठने लगी है। कई नेताओं ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखे हैं। वहीं अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या 18 साल के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाना सही रहेगा या नहीं। इस विषय पर दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने एक मीडिया हाउस के साथ बातचीत में कहा कि सभी के टीकाकरण का आइडिया ठीक नहीं है क्योंकि इससे जरूरतमंद वर्ग को वैक्सीन का अभाव हो जाएगा। 

बुजुर्गों को इम्यून करना बहुत जरूरी है क्योंकि नहीं तो उनकी मृत्यु दर में अप्रत्याशित वृद्धि हो जाएगी। उन्होंने बताया कि हमारे देश में 18 साल से ऊपर की करीब 97 करोड़ आबादी है। चूंकि हर व्यक्ति को दो-दो डोज देना पड़ता है तो हमें करीब 2 अरब डोज चाहिए। अगर हम दुनियाभर से वैक्सीन मंगाकर जमा कर लें तो भी 2 अरब डोज नहीं हो पाएगी। अगर हमने प्रायॉरिटी तय करनी छोड़ दी तो कोविड बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अपनी चपेट में लेने लगेगा और फिर मौतों का सिलसिला बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन, अमेरिका, यूरोप- सभी ने प्राथमिकता निर्धारण की नीति अपनाई है। यूरोप के मुकाबले देखें तो हमने जर्मनी की आबादी के बराबर वैक्सीनेशन कर दी है। गुलेरिया ने देश में टीकाकरण अभियान की रफ्तार पर भी संतोष जताया।  

दरअसल भारत के कई राज्यों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोरोना की वैक्सीन 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगाने की इजाज़त दी जाए। इसको लेकर केंद्र सरकार को चि_ी भी लिखी गई है. लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक वैक्सीनेशन ऐसे तय नहीं होता है और इसकी एक प्रक्रिया होती है।  दुनिया का हर देश एक योजनबद्ध तरीके से टीकाकरण अभियान चलाता है।

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