भारत-बांग्लादेश के बीच हुए पांच अहम समझौते, प्रधानमंत्री मोदी ने एंबुलेंस की चाबियां शेख हसीना को सौंपी

ढाका (मानवी मीडिया): भारत एवं बंगलादेश ने अपने राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर आपसी सहयोग के पांच करारों पर हस्ताक्षर किये और दोनों पड़ोसियों के रिश्तों की मधुरता एवं अमरता की कामना की। भारत ने बंगलादेश को उपहार स्वरूप 12 लाख कोविड टीके और 109 एंबुलेंस की चाबियां सौंपी। बंगलादेश की दो दिन की यात्रा पर आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मेजबान प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। दोनों देशों के बीच हुए पांच समझौतों में कारोबार और बंगलादेश में आईटी क्षेत्र की अवसंरचना के विकास में भारत के सहयोग को लेकर करार शामिल है। बैठक में बंगलादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन, भारत के विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला और भारत के उच्चायुक्त विक्रम दुरैस्वामी भी उपस्थित थे।बैठक के दौरान बंगलादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के अवसंरचना विकास में भारत की अधिक भागीदारी के ऐलान के साथ ही दोनों देशों के बीच हल्दीबाड़ी- चिलघाटी रेल मार्ग पर एक नयी ट्रेन ढाका-न्यू जलपाईगुड़ी मिताली एक्सप्रेस चलाने की घोषणा की। साथ ही दोनों प्रधानमंत्रियों ने बंगलादेश में भारतीय सेना के शहीदों की स्मृति में एक स्मारक का शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद संयुक्त वक्तव्य के दौरान  हसीना को भारत की मैत्री भावना प्रदर्शित करते हुए उपहार स्वरूप 109 एम्बुलैंस गाड़ियों की चाबी तथा बंगलादेश को 12 लाख कोविड टीके के प्रतीक चिह्न सौंपे। भारत पहले ही बंगलादेश को दस लाख से अधिक कोविड के टीके दे चुका है। बंगलादेश की प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी को बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की जन्मशती के मौके पर जारी एक स्वर्ण एवं एक रजत मुद्राएं भेंट कीं।  हसीना ने बंगलादेश के गठन के 50 वर्ष पूरे होने पर जारी एक चांदी का सिक्का भी सौंपा। मोदी ने द्विपक्षीय बैठक के बाद बंगलादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद से भी भेंट की।मोदी बंगलादेश की दो दिन की सरकारी यात्रा पर कल यहां पहुंचे थे। शनिवार को यात्रा के दूसरे दिन की शुरुआत मां काली की आराधना के साथ हुई। मोदी सुबह ढाका से हेलीकाॅप्टर द्वारा सतखीरा जिले के श्यामनगर पहुंचे और वहां से कार से मंदिर गये। मंदिर परिसर में मोदी का पांरपरिक ढंग से भव्य स्वागत किया गया। पौराणिक 51 शक्तिपीठों में से एक यशोरेश्वरी काली शक्तिपीठ में मोदी ने मां को चांदी का बना सोने का पानी चढ़ा एक मुकुट भेंट किया। मोदी ने मंदिर में विश्व को कोरोना के संकट से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। तथा मंदिर में एक ऐसे सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए अनुदान की घोषणा की जहां तूफान आने पर लोग शरण भी ले सकें।बाद में मोदी ने तुंगीपाड़ा स्थित बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के मजार पर गये जहां प्रधानमंत्री शेख हसीना एवं उनकी बहन ने उनका स्वागत किया। मोदी ने मजार पर पुष्पचक्र अर्पित करके दिवंगत नेता को अपनी श्रद्धांजलि दी और आगंतुक पुस्तिका में श्रद्धा के उद्गार अंकित किये। इसके बाद मोदी ने वहां एक पौधा भी लगाया। तत्पश्चात प्रधानमंत्री ओराकांडी के मतुआ समुदाय के मंदिर पहुंचे और पूजा अर्चना की। ओराकांडी वही जगह है जहां मतुआ समुदाय के संस्थापक हरिशचंद्र हरिशचंद्र ठाकुर का जन्म हुआ था। ओराकांडी में मोदी ने कहा, “मैं कई सालों से इस अवसर का इंतजार कर रहा था। बंगलादेश की 2015 की यात्रा के दौरान मैंने ओराकांडी आने की इच्छा जाहिर की थी और वो इच्छा पूरी हो गई।

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