इमरान खान की नई चाल भारत से फिर व्यापार शुरू करने का फैसला


नई दिल्ली(मानवी मीडिया): भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार को लेकर इमरान खान की कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि आर्थिक मामलों से जुड़ी कैबिनेट ने भारत के साथ ट्रेड को मंजूरी दी है। अब पाकिस्तान जून 2021 तक भारत से कपास का आयात करेगा। वहीं पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान चीनी को लेकर भी जल्द फैसला ले सकता है और आयात पर मुहर लगा सकता है। इमरान खान को भारत का जवाब- पाकिस्तान की GDP जितना हमारा राहत पैकेज - 

बता दें कि पाकिस्‍तान चीनी की बढ़ती कीमतों और संकटों से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार ने भारत के साथ व्‍यापार की फिर से शुरू करने का फैसला लिया है। दोनों देशों में तनावपूर्ण रिश्‍तों के बीच यह पाकिस्‍तान का भारत के साथ संबंधों को सुधारने की दिशा में पहला बड़ा प्रयास है। पहले अगस्‍त 2019 में जम्‍मू-कश्‍मीर का विशेष दर्जा खत्‍म करने के बाद पाकिस्‍तान ने भारत के साथ रिश्‍ते को तोड़ लिया था। पाकिस्‍तान सरकार चीनी और कॉटन का आयात ऐसे समय पर करने जा रही है जब इन दोनों के लिए पाकिस्‍तान को काफी मशक्‍कत करनी पड़ रही है।केंद्र सरकार ने बीटी कपास बीज का बिक्री मूल्य 730 रुपए प्रति पैकेट घोषित  किया

इमरान खान ने पीएम मोदी को लिखा था पत्र

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर कहा है कि जम्मू कश्मीर मुद्दा सहित दोनों देशों के बीच लंबित सभी मुद्दों का समाधान करने को लेकर सार्थक और नतीजे देने वाली वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है। खान ने यह पत्र पाकिस्तान दिवस के मौके पर पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें भेजी गई बधाइयों के जवाब में लिखा है। वहीं पीएम मोदी ने अपने पत्र में कहा था कि पाकिस्तान के साथ भारत सौहार्द्रपूर्ण संबंधों की आकांक्षा करता है, लेकिन विश्वास का वातावरण, आतंक और बैर रहित माहौल इसके लिए ‘अनिवार्य’ है। प्रधानमंत्री मोदी के पत्र के जवाब में खान ने उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि पाकिस्तान के लोग भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सहयोगी संबंध की आकांक्षा करते हैं। आतंक मुक्त माहौल पर खान ने कहा कि शांति तभी संभव है, यदि कश्मीर जैसे सभी लंबित मुद्दों का समाधान हो जाए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने 29 मार्च को लिखे पत्र में कहा, ‘हम इस बात से सहमत हैं कि खासतौर पर जम्मू कश्मीर विवाद जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच लंबित सभी मुद्दों के समाधान पर दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति एवं स्थिरता निर्भर करती है।

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