जिसके अंतिम संस्कार की थी तैयारी वो निकला जिंदा, सिर्फ 2 प्रतिशत दिमाग के साथ जन्मे इस बच्चे ने डॉक्टरों को भी किया हैरान

वाशिंगटन (मानवी मीडिया) जब नोआह वॉल पैदा हुआ तब उसके पास सिर्फ 2 फीसदी दिमाग ही था। जिसे देकर डॉक्टर्स भी हैरान थे। डॉक्टरों को लगा था कि ये बच्चा ढंग से जिंदगी जी नहीं पाएगा। क्योंकि इसे दो दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों ने एकसाथ जकड़ रखा है। इस बारे में डॉक्टरों ने नोआह के माता-पिता को बताया कि ये बच्चा न चल पाएगा, न खुद से खा पाएगा और न ही बात कर पाएगा। जिसके बाद सब दुखी हो गए। उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गई थीं। कॉफिन भी खरीद लिया गया था पर आज, नोआह 9 साल का है। वह एस्ट्रोनॉट बनना चाहता है। अब उसके दिमाग में बहुत बदलाव हो चुका है।

बताया जा रहा है कि जब नोआह गर्भ में था। तब डॉक्टरों ने उसके माता-पिता को बताया कि नोआह को स्पाइना बोफिडा नाम की बीमारी हो रही है। हो सकता है कि ये बच्चा जब पैदा हो तो इसकी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह ने विकसित न हो। जिसके कारण बच्चे के सीने के नीचे का शरीर लकवाग्रस्त हो जाएगा। गर्भ में ही नोआह के दिमाग की स्कैनिंग की गई तो पता चला कि उसका ज्यादातर दिमाग गायब है। नोआह का दिमाग सिर्फ 2 फीसदी ही विकसित हुआ है। क्योंकि उसके दिमाग में पोरिनसेफेलिक सिस्ट है। जिसकी वजह से दिमाग का बड़ा हिस्सा नष्ट हो रहा है। डॉक्टरों को लगा कि बच्चे ने एडवर्ड सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम विकसित कर लिया है। इन दोनों दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों के होने के बाद किसी के भी बचने की संभावना बहुत कम होती है। 

एडवर्ड सिंड्रोम को ट्राईसोमी 18 के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर स्वस्थ इंसान में क्रोमोसोम 18 की दो कॉपी पाई जाती हैं। जबकि, ट्राईसोमी 18 में ये कॉपी बढ़कर तीन हो जाती हैं। अगर इस बीमारी के साथ दुनिया में 100 बच्चे पैदा होते हैं तो उनमें से सिर्फ 13 ही जीवित रह पाते हैं। बाकियों की मौत उनके पहले जन्मदिन से पहले हो जाती है। इसी तरह पटाऊ सिंड्रोम क्रोमोसोम 13 की अतिरिक्त कॉपी बन जाती है। 10 में से किसी एक बच्चे को यह बीमारी होती है। यह अत्यधिक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है. इससे ग्रसित बच्चा एक साल भी जिंदा नहीं रहता। 

इस मामले में नोआह की मां मिशेल वॉल का कहना है कि हम लोगों ने कॉफिन की तैयारी करवा ली थी। अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली थी, लेकिन जन्म तो देना ही था। जब नोआह हुआ तो उसने ऐसी चीख लगाई कि मुझसे रहा नहीं गया। इस चीख से डॉक्टर भी हैरान रह गए क्योंकि उन्हें एक इतने सक्रिय बच्चे की उम्मीद नहीं थी। जिसके तुरंत बाद बच्चे का MRI स्कैन कराया गया। 

बच्चा 2 फीसदी दिमाग के साथ पैदा हुआ था। इस स्थिति को हॉइड्रोसिफैलस कहते हैं। इसकी वजह से दिमाग में एक खास तरह का तरल पदार्थ जमा हो जाता है। फिर डॉक्टरों ने अनुमान लगाया कि अभी तो चीखा था, लेकिन हो सकता है कि इसके बाद ये वेजिटेटिव स्टेट यानी निष्क्रिय अवस्था में चला जाए पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। वर्त्तमान में नोआह 9 साल का है। उसने चमत्कारिक रूप से विकास किया है। वो पढ़ लेता है। वह एस्ट्रोनॉट बनना चाहता है। नोआह को उसकी मां ने घर में ही पढ़ाया लिखाया है। दुर्भाग्य की बात ये है कि नोआह के दिमाग और रीढ़ की हड्डी का जुड़ाव नहीं हो पाया। इसलिए नोआह चल नहीं सकता, लेकिन नोआह अब 9 साल के बच्चे की तरह दिखता भी है।   

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